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हस्तिनापुर साहित्य महोत्सव-2026: ज्ञान, संस्कृति और साहित्य का भव्य संगम

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हस्तिनापुर साहित्य महोत्सव-2026: ज्ञान, संस्कृति और साहित्य का भव्य संगम


हस्तिनापुर। प्राचीन ऐतिहासिक नगरी हस्तिनापुर में “हस्तिनापुर साहित्य महोत्सव-2026” का भव्य आयोजन ज्ञान, साहित्य और भारतीय संस्कृति के अनूठे संगम के रूप में संपन्न हुआ। अखिल भारतीय साहित्य परिषद, श्री वेंकटेश्वरा विश्वविद्यालय और बहसूमा रियासत के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में देशभर से साहित्यकार, कवि और चिंतक बड़ी संख्या में शामिल हुए।



हस्तिनापुर के समीप स्थित ऐतिहासिक बहसूमा रियासत में आयोजित इस महोत्सव का उद्घाटन पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं केरल व बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, श्री वेंकटेश्वरा विश्वविद्यालय के प्रतिकुलाधिपति डॉ. राजीव त्यागी, पूर्व पुलिस महानिदेशक देवराज नागर और मुंबई से आईं प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. वैदेही तामण ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि हस्तिनापुर भारत की प्राचीन विरासत का प्रतीक है और आत्मबोध से विश्वबोध का संदेश देता है। उन्होंने बहसूमा रियासत के गौरवशाली इतिहास और 1857 की क्रांति में उसके योगदान को भी याद किया।



कार्यक्रम की अध्यक्षता स्वामी कर्मवीर जी महाराज ने की। इस दौरान “आत्मबोध से विश्वबोध” विषय पर आयोजित व्याख्यानमाला में वक्ताओं ने आत्मचिंतन, आध्यात्मिक जागृति और वैश्विक चेतना के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।

महोत्सव के दौरान कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन किया गया, जिनमें डॉ. यतीन्द्र कटारिया की “हस्तिनापुर: कल, आज और कल”, आदर्श कुमार जैन की “अनुभूति”, डॉ. वैदेही तामण की “वीर सावरकर” और सुरेंद्र सिंह की “उजाले की ओर” प्रमुख रहीं।



कार्यक्रम का विशेष आकर्षण अखिल भारतीय कवि सम्मेलन रहा, जिसमें देशभर से आए कवियों ने ओज, हास्य, श्रृंगार और करुण रस की प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले साहित्यकारों को सम्मानित भी किया गया।



वेंकटेश्वरा समूह के संस्थापक अध्यक्ष सुधीर गिरि ने अगले वर्ष अप्रैल में इसी तर्ज पर “अमरोहा साहित्य महोत्सव” आयोजित करने की घोषणा की।

कार्यक्रम में डॉ. पुष्कर मिश्रा, प्रो. पुरुषोत्तम पाटिल, प्रो. लहरी राम मीणा, महाकवि देवेंद्र देव सहित अनेक साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों ने अपने विचार व्यक्त किए। बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और साहित्य प्रेमियों की उपस्थिति ने आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।



कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए वेंकटेश्वरा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कृष्णकांत दवे, वित्तीय सलाहकार सीए युवराज सिंह, कुलसचिव पीयूष कुमार पांडेय और अन्य पदाधिकारियों ने सभी आयोजकों को बधाई दी।

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